Misc Praise Songs – Namami Samishan Shatkam (Guitar)

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Chords

[Intro]
Db                Ab           Gb           Ab    Db
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं,            विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।

Db                  Ab            Bbm        Gb     Db
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं,             चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम् ॥

Db               Ab            Gb        Ab      Db
निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं,             गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।

Db                  Ab           Bbm      Gb      Db
करालं महाकालकालं कृपालं,             गुणागारसंसारपारं नतोहम् ॥

Db               Ab           Gb        Ab       Db
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं,             मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।

Db                   Ab           Bbm       Gb       Db
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा,            लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥
[Mid](Higher octave)
Db                 Ab           Gb         Ab       Db
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं,             प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।

Db                 Ab          Bbm        Gb       Db
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं,             प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥

Db                 Ab             Gb        Ab       Db
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं,             अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ।

Db              Ab           Bbm       Gb       Db
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं,            भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥

Db                  Ab              Gb        Ab       Db
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी,              सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।

Db                Ab           Bbm       Gb       Db
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी,            प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥

Db                 Ab                Gb       Ab       Db
न यावद् उमानाथपादारविन्दं,              भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

Db              Ab            Bbm        Gb      Db
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं,       प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥

Db                   Ab             Gb         Ab       Db
न जानामि योगं जपं नैव पूजां,            नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।

Db               Ab           Bbm         Gb       Db
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं,           प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥